आज विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है मनुष्य द्वारा प्रकृति के असीमित दोहन के फलस्वरूप उपजे असंतुलन को देखते हुए विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की जरूरत पड़ी विश्व पर्यावरण दिवस सम्पूर्ण विश्व को पर्यावरण के प्रति जाग्रत करने का संदेश प्रेषित करता है
आज हम देखे तो हमारे आसपास की प्रकृति बदल चुकी है जहाँ जंगल नदी पहाड़ होते थे वहां आज मानव बस्ती, गन्दे नाले और कुड़े के ढेर है पर्यावरण को सर्वाधिक नुकसान पेड़ो के कटाई प्लास्टिक के उपयोग वाहनों के धुएं और कारखाने से निकलने वाले धुएं और केमिकल युक्त पानी से हुआ है और इसके दुष्प्रभाव से प्रकर्ति अपना संतुलन खो रही है ऋतुए अपना समय बदल रही है ना समय पर बारिश आती है ना ठंड कुछ जगह बारिश अत्यधिक होती है तो कुछ जगह अल्प बारिश ग्लोबल वार्मिग के चलते पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है
इस वर्ष पर्यावरण दिवस 2018 को 'बीट प्लास्टिक पलूशन' थीम पर मनाने का फैसला किया गया। इसके जरिए सरकारों, उद्योगों, विभिन्न समुदायों और आम जनता से मिलकर प्लास्टिक से निपटने का अनुरोध किया जा रहा है जिससे विकल्प तलाश कर प्लास्टिक उत्पादन में कमी लाई जा सके। भारत इस बार विश्व पर्यावरण दिवस का ग्लोबल होस्ट भी है!
हमे अगर हमारा पर्यावरण हमारी पृथ्वी बचानी है तो धरती को सबसे ज्यादा प्रदूषित करने वाली वस्तु प्लास्टिक का विकल्प खोजना होगा हम अगर अपनी छोटी छोटी जरूरतों में प्लास्टिक का उपयोग बन्द कर दे तो बहुत हद तक इस समस्या से निपटा जा सकता है
विवाह समारोह व अन्य आयोजन में जो प्लास्टिक ग्लास पानी की बोतले उपयोग की जा रही है उनकी जगह धातु या कांच के दोबारा उपयोग में लिये जाने वाले ग्लास प्रयोग करे बाजार में खरीदारी करते समय अपने साथ कपड़े का बैग इस्तेमाल करे जहा तक सम्भव हो प्लास्टिक के उपयोग को नकारे जब तक आमलोग प्लास्टिक का बहिष्कार नही करते इस समस्या का समाधान सम्भव नही दिखता साथ ही पृथ्वी को हरा भरा बनाए रखने के लिए वृक्ष लगाना भी उतना ही जरूरी है
बीते कुछ वर्षो में प्रकृतिक दुर्घटनाओं का बढ़ना भी इसी असंतुलन के परिणामस्वरूप हो रहा है केदारनाथ में हुई घटना कहि ना कहि प्रकृति से छेड़छाड़ का नतीजा है इस तरह की घटनाएं हमे इंगित करती है कि अब भी समय है हम प्रकृति की विनाशलीला से बच सकते है हमे प्रकर्ति के साथ हो रहे खिलवाड़ विरूद्ध जनजागृति लानी होगी तभी पर्यावरण दिवस मनाना सार्थक होगा
पर्यावरण में बदलाव मनुष्य की सेहत को भी प्रभावित कर रहा है ऐसे कई शोध हुए है जिनमे केन्सर, जैसे रोगों के लिए प्लास्टिक फेफड़ो के संक्रमण के लिए वाहनों के जरिये वायु में घुल रहे लेड को जिम्मेदार माना गया है अब तो बच्चो में जन्म से कई विकृतियां होने लगी है जिसकी बड़ी वजह भी पर्यावरण का बिगड़ना है प्लास्टिक को खत्म होने में 700 से 1000 वर्ष लगते है इतने वर्षों में ये हमारी पृथ्वी को कितना नुकसान पहुचायेगी इसकी कल्पना कीजिये, आज से ही प्लास्टिक से बने उत्पादों का उपयोग सीमित कीजिये तभी पर्यावरण दिवस मनाने का महत्व सार्थक होगा!
आज हम देखे तो हमारे आसपास की प्रकृति बदल चुकी है जहाँ जंगल नदी पहाड़ होते थे वहां आज मानव बस्ती, गन्दे नाले और कुड़े के ढेर है पर्यावरण को सर्वाधिक नुकसान पेड़ो के कटाई प्लास्टिक के उपयोग वाहनों के धुएं और कारखाने से निकलने वाले धुएं और केमिकल युक्त पानी से हुआ है और इसके दुष्प्रभाव से प्रकर्ति अपना संतुलन खो रही है ऋतुए अपना समय बदल रही है ना समय पर बारिश आती है ना ठंड कुछ जगह बारिश अत्यधिक होती है तो कुछ जगह अल्प बारिश ग्लोबल वार्मिग के चलते पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है
इस वर्ष पर्यावरण दिवस 2018 को 'बीट प्लास्टिक पलूशन' थीम पर मनाने का फैसला किया गया। इसके जरिए सरकारों, उद्योगों, विभिन्न समुदायों और आम जनता से मिलकर प्लास्टिक से निपटने का अनुरोध किया जा रहा है जिससे विकल्प तलाश कर प्लास्टिक उत्पादन में कमी लाई जा सके। भारत इस बार विश्व पर्यावरण दिवस का ग्लोबल होस्ट भी है!
हमे अगर हमारा पर्यावरण हमारी पृथ्वी बचानी है तो धरती को सबसे ज्यादा प्रदूषित करने वाली वस्तु प्लास्टिक का विकल्प खोजना होगा हम अगर अपनी छोटी छोटी जरूरतों में प्लास्टिक का उपयोग बन्द कर दे तो बहुत हद तक इस समस्या से निपटा जा सकता है
विवाह समारोह व अन्य आयोजन में जो प्लास्टिक ग्लास पानी की बोतले उपयोग की जा रही है उनकी जगह धातु या कांच के दोबारा उपयोग में लिये जाने वाले ग्लास प्रयोग करे बाजार में खरीदारी करते समय अपने साथ कपड़े का बैग इस्तेमाल करे जहा तक सम्भव हो प्लास्टिक के उपयोग को नकारे जब तक आमलोग प्लास्टिक का बहिष्कार नही करते इस समस्या का समाधान सम्भव नही दिखता साथ ही पृथ्वी को हरा भरा बनाए रखने के लिए वृक्ष लगाना भी उतना ही जरूरी है
बीते कुछ वर्षो में प्रकृतिक दुर्घटनाओं का बढ़ना भी इसी असंतुलन के परिणामस्वरूप हो रहा है केदारनाथ में हुई घटना कहि ना कहि प्रकृति से छेड़छाड़ का नतीजा है इस तरह की घटनाएं हमे इंगित करती है कि अब भी समय है हम प्रकृति की विनाशलीला से बच सकते है हमे प्रकर्ति के साथ हो रहे खिलवाड़ विरूद्ध जनजागृति लानी होगी तभी पर्यावरण दिवस मनाना सार्थक होगा
पर्यावरण में बदलाव मनुष्य की सेहत को भी प्रभावित कर रहा है ऐसे कई शोध हुए है जिनमे केन्सर, जैसे रोगों के लिए प्लास्टिक फेफड़ो के संक्रमण के लिए वाहनों के जरिये वायु में घुल रहे लेड को जिम्मेदार माना गया है अब तो बच्चो में जन्म से कई विकृतियां होने लगी है जिसकी बड़ी वजह भी पर्यावरण का बिगड़ना है प्लास्टिक को खत्म होने में 700 से 1000 वर्ष लगते है इतने वर्षों में ये हमारी पृथ्वी को कितना नुकसान पहुचायेगी इसकी कल्पना कीजिये, आज से ही प्लास्टिक से बने उत्पादों का उपयोग सीमित कीजिये तभी पर्यावरण दिवस मनाने का महत्व सार्थक होगा!
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