चंपा चमेली बेला जूही सबकुछ खिला
लेकिन कभी इस बगिया में गुलाब नही खिलायू तो आते जाते रहे हर मौसम बदलकर
बस फिर कभी हमे वो सावन नही मिला
देखे है सभी रँग इंद्रधनुषी उस आसमान में
लेकिन हमे फिर कभी वो गुलाल नही मिला
जीवन के उपवन मे गुलमोहर मिला अमलताश मिला
लेकिन फिर कभी वो दहकता सुर्ख पलाश नही मिला
जिंदगी की बगिया महकी तो बहुत
लेकिन फिर कभी वो गुलाब नही खिला
