रविवार, 16 जून 2019

मेरे पिता मेरे हीरो

कल रात देर से सोने के कारण सुबह नींद देर से खुली इसी कारण आज दुकान पहुचने में लेट हो गया। वेसे मेरे साथ ऐसा अक्सर ऐसा होता है में कभी दुकान पर समय से नही पहुँच पाता हु। दुकान पहुचने पर पता चला काम करने वाला एकमात्र कर्मचारी आज से दुकान पर नही आयेगा। पिताजी तब तक दुकान खोल चुके थे। दिया बत्ती करके कुछ देर मोबाइल लेकर बैठा तो सोशल मीडिया से पता चला कि आज फादर्स डे है। जब से सोशल मीडिया एक्टिव हुआ है तब से ये डे मनाने की प्रथा शुरू हुई है। हमारे बचपन और स्कूल के दिनों में तो ऐसी कोई प्रथा नही थी। फादर्स डे 365 दिन में एक दिन उनकी खातिरदारी करो , सोशल मीडिया पर उनके फोटो चिपकाओ बाकी दिन उनसे कोई सरोकार नही।

 मेरी पिताजी से हमेशा नोक झोंक होती रहती है। बहुत सारी जगह हमारे विचार मेल नही खाते कितनी ही मर्तबा किसी विषय को लेकर तीखी बहस भी होती है।  आज की घटना (कर्मचारी के जाने की) के बाद खाली बैठा था। फिर सोचा चलो आज फादर्स डे है और इतवार भी जो कि फुर्सत का दिन है क्यो ना पिताजी के बारे में कुछ लिखा जाए। पिताजी जीनकी उम्र लगभग 65 वर्ष है जिन्होंने बचपन से घोर अभाव देखे गरीबी का आवरण लिए इस दुनिया में दाखिल हुए और निरन्तर संघर्ष करते हुए आज हमें इस मुकाम पर पहुचाया। चाय की होटल पर काम हो, हलवाई का काम हो, या सिलावटी हर काम उम्र के अलग अलग दोर में किया और पैतृक काम सिलाई जो आज इस उम्र में भी बन्द नही की है। उनकी दिनचर्या सुबह 4.30 बजे से शुरू होकर रात 11 बजे तक चलती है इसमें दोपहर में कुछ समय का विश्राम भी सम्मिलित है। में ना तो कभी सुबह जल्द उठ पाता हूं ना उनकी तरह अपनी दिनचर्या बना पाता हु। लेकिन हर वक्त दिमाग मे उनकी तरह बनने का विचार जरूर रहता है। इंसान कितना ही बड़ा बन जाये लेकिन दुनिया मे पिता से बड़ा कभी नही हो सकता क्योंकि जो कष्ट उन्होंने हमें पालने में झेले है वो हमारे द्वारा उनके प्रति किये गए कर्तव्यों से कई गुना बड़े है जीवन के प्रति पिताजी उत्साह देखते ही बनता है। किसी रिश्तेदार से मेलमिलाप हो या किसी शादी या अन्य समारोह में शामिल होना हो उनका उत्साह हर कार्य के प्रति काबिले तारीफ होता है टेक्नोलॉजी के इस दौर में उनका टेक्निकल चीजो के प्रति प्रेम उनके जीवन की सकारात्मक सोच दर्शाता है वे एंड्रॉयड फोन का उपयोग करने वाले परिवार के सबसे ज्यादा उम्र के व्यक्ति है परिवार के दूसरे सदस्य जो उनसे उम्र में काफी छोटे है फोन का उपयोग ही नही जानते  वहीँ पिताजी वाट्सएप के जरिये अपने मित्रों और रिश्तेदरो से निरन्तर सम्पर्क में रहते है वही यूट्यूब पर हमेशा कुछ नया खोजा करते है
घर मे किसी अवसर पर समोसे बनाना हो या गुलाबजामुन पिताजी हमेशा उस काम में भी अपनी गहरी रुचि दिखाते है और अपने अनुभव से किसी पकवान के स्वाद को बढ़ाने में कोई कसर नही छोड़ते उनके हाथ की मवाबाटी आज भी किसी बड़े होटल या शेफ को मात देती है।

 ईश्वर के प्रति इतनी गहरी आस्था है की हर काम ईश्वर के नाम से ही शुरू करते है कितना ही काम हो या कितनी ही जल्दी सुबह कँही जाना हो बिना पूजा पाठ और मंदिर दर्शन के बगैर कभी घर से नही निकलते उनकी जीवन के प्रति यही सकारात्म सोच हमे प्रेरित करती है निरन्तर संघर्ष करने के लिए कितनी ही बार विपरीत परिस्थितिया आई लेकिन पिताजी हमेशा प्रेरणास्त्रोत बने रहे बहुत से मौकों पर मतभिन्नता रही लेकिन जीवन के असली हीरो हमेशा पिताजी ही रहें हैं।

आज फादर्स डे पर उनको बहुत बधाई और ईश्वर से प्रार्थना वे सदैव हस्ते मुस्कुराते रहे स्वस्थ रहे और उनका जीवन के प्रति यही सकारात्म नजरिया हमारा प्रेरणा स्त्रोत बना रहे

भवानीप्रसाद मिश्र जी की एक कविता की कुछ पंक्तियाँ जो उनके जीवन से मेल खाती है

पिताजी जिनको बुढ़ापा,
एक क्षण भी नहीं व्यापा,
जो अभी भी दौड़ जाएं,
जो अभी भी खिल-खिलाएं,


मौत के आगे न हिचकें,
शेर के आगे न बिचकें,
बोल में बादल गरजता,
कम में झंझा लरजता,


आज गीता पाठ करके,
दंड दो सौ आठ करके,
ख़ूब मुगदर हिला लेकर,
मूठ उसकी मिला लेकर,



देह एक पहाड़ जैसे,
मन कि बड़ का झाड़ जैसे


एक पत्ता टूट जाये,
बस कि धारा फूट जाये,
एक हलकी चोट लग ले,
दूध की नद्दी उमग ले,


एक टहनी कम न होले,
कम कहां कि ख़म न होले,
ध्यान कितना फ़िक्र कितनी,
डाल जितनी जड़ें उतनी !

इस तरह का हाल उनका,
इस तरह का ख़याल उनका,




Happy fathers day
            पापा